वन पर्व  अध्याय १४६

वैशम्पाय़न उवाच

तानौदकान्पक्षिगणान्निरीक्ष्य भरतर्षभः |  ५२   क
तानेवानुसरन्रम्यं ददर्श सुमहत्सरः ||  ५२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति