आदि पर्व  अध्याय ७८

देवय़ान्यु उवाच

धर्मज्ञ इति विख्यात एष राजा भृगूद्वह |  २९   क
अतिक्रान्तश्च मर्यादां काव्यैतत्कथय़ामि ते ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति