वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

अथ वारण्यनृपते नलं यदि न शंससि |  ३३   क
मामदस्व मृगश्रेष्ठ विशोकां कुरु दुःखिताम् ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति