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उद्योग पर्व
अध्याय १४७
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वासुदेव उवाच
प्राज्ञश्च सत्यसन्धश्च सर्वभूतहिते रतः |  १९   क
वर्तमानः पितुः शास्त्रे व्राह्मणानां तथैव च ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति