उद्योग पर्व  अध्याय १४७

वासुदेव उवाच

स तच्छ्रुत्वा तु नृपतिरभिषेकनिवारणम् |  २३   क
अश्रुकण्ठोऽभवद्राजा पर्यशोचत चात्मजम् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति