उद्योग पर्व  अध्याय १४७

वासुदेव उवाच

यादवानां कुलकरो वलवान्वीर्यसंमतः |  ७   क
अवमेने स तु क्षत्रं दर्पपूर्णः सुमन्दधीः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति