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द्रोण पर्व
अध्याय १४७
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सञ्जय़ उवाच
कर्णश्च दशभिर्वाणैः पुत्रश्च तव सप्तभिः |  १२   क
दशभिर्वृषसेनश्च सौवलश्चापि सप्तभिः |  १२   ख
एते कौरव सङ्क्रन्दे शैनेय़ं पर्यवारय़न् ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति