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शान्ति पर्व
अध्याय १८५
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भृगुरु उवाच
उत्तरः पृथिवीभागः सर्वपुण्यतमः शुभः |  २१   क
इहत्यास्तत्र जाय़न्ते ये वै पुण्यकृतो जनाः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति