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द्रोण पर्व
अध्याय १७१
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सञ्जय़ उवाच
नैतदावर्तते राजन्नस्त्रं द्विर्नोपपद्यते |  २७   क
आवर्तय़न्निहन्त्येतत्प्रय़ोक्तारं न संशय़ः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति