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अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
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भीष्म उवाच
स्वदेशे परदेशे वाप्यतिथिं नोपवासय़ेत् |  १८   क
कर्म वै सफलं कृत्वा गुरूणां प्रतिपादय़ेत् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति