menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
chevron_left
chevron_right
धृतराष्ट्र उवाच
ये क्षन्तारो नाभिजल्पन्ति चान्या; ञ्शक्ता भूत्वा सततं पुण्यशीलाः |  ३१   क
तथाविधानामेष लोको महर्षे; परं गन्ता धृतराष्ट्रो न तत्र ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति