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अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
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भीष्म उवाच
यथा वार्धुषिको वृद्धिं देहभेदे प्रतीक्षते |  ३०   क
धर्मेणापिहितं पापं धर्ममेवाभिवर्धय़ेत् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति