वन पर्व  अध्याय १४८

हनूमानु उवाच

चातुराश्रम्ययुक्तेन कर्मणा कालय़ोगिना |  २०   क
अकामफलसंय़ोगात्प्राप्नुवन्ति परां गतिम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति