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शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
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भीष्म उवाच
पक्षिराजो गरुत्मांश्च यं नित्यमधिगच्छति |  ६   क
चत्वारो लोकपालाश्च देवाः सर्षिगणास्तथा |  ६   ख
यत्र नित्यं समाय़ान्ति लोकस्य हितकाम्यया ||  ६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति