वन पर्व  अध्याय १४८

हनूमानु उवाच

युगेष्वावर्तमानेषु धर्मो व्यावर्तते पुनः |  ३५   क
धर्मे व्यावर्तमाने तु लोको व्यावर्तते पुनः ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति