द्रोण पर्व  अध्याय १४८

घटोत्कच उवाच

न चात्र शूरान्मोक्ष्यामि न भीतान्न कृताञ्जलीन् |  ५९   क
सर्वानेव वधिष्यामि राक्षसं धर्ममास्थितः ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति