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कर्ण पर्व
अध्याय २७
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सञ्जय़ उवाच
मद्रके सङ्गतं नास्ति हतं वृश्चिकतो विषम् |  ८३   क
आथर्वणेन मन्त्रेण सर्वा शान्तिः कृता भवेत् ||  ८३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति