आदि पर्व  अध्याय १४९

व्राह्मण उवाच

आत्मनस्तु मय़ा श्रेय़ो वोद्धव्यमिति रोचय़े |  ६   क
व्रह्मवध्यात्मवध्या वा श्रेय़ आत्मवधो मम ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति