शान्ति पर्व  अध्याय १४९

जम्वुक उवाच

अहो पुत्रविय़ोगेन मृतशून्योपसेवनात् |  ४४   क
क्रोशतां वै भृशं दुःखं विवत्सानां गवामिव ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति