menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
नैष धर्मो महीपालाः शरतल्पगतस्य मे |  ५४   क
एतैरेव शरैश्चाहं दग्धव्योऽन्ते नराधिपाः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति