शान्ति पर्व  अध्याय १४९

जम्वुक उवाच

श्रूय़ते शम्वुके शूद्रे हते व्राह्मणदारकः |  ६२   क
जीवितो धर्ममासाद्य रामात्सत्यपराक्रमात् ||  ६२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति