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द्रोण पर्व
अध्याय १३३
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सञ्जय़ उवाच
एते स्थास्यन्ति सङ्ग्रामे पाण्डवानां वधार्थिनः |  ५७   क
जय़माकाङ्क्षमाणा हि कौरवेय़स्य दंशिताः ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति