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शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
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वैशम्पाय़न उवाच
वाराहं नारसिंहं च वामनं मानुषं तथा |  ३६   क
एभिर्मय़ा निहन्तव्या दुर्विनीताः सुरारय़ः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति