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शल्य पर्व
अध्याय २२
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सञ्जय़ उवाच
तथैव पाण्डवानीकं रुधिरेण समुक्षितम् |  ५६   क
षट्सहस्रैर्हय़ैः शिष्टैरपाय़ाच्छ्रान्तवाहनम् ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति