वन पर्व  अध्याय २३१

वैशम्पाय़न उवाच

तांस्तथा व्यथितान्दीनान्भिक्षमाणान्युधिष्ठिरम् |  १४   क
वृद्धान्दुर्योधनामात्यान्भीमसेनोऽभ्यभाषत ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति