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वन पर्व
अध्याय १३
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अर्जुन उवाच
आसीनं चित्तमध्ये त्वां दीप्यमानं स्वतेजसा |  ३३   क
आगम्य ऋषय़ः सर्वेऽय़ाचन्ताभय़मच्युत ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति