विराट पर्व  अध्याय २४

वैशम्पाय़न उवाच

न तत्र पाण्डवा राजन्नापि कृष्णा पतिव्रता |  १६   क
सर्वथा विप्रनष्टास्ते नमस्ते भरतर्षभ ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति