वन पर्व  अध्याय १४९

वैशम्पाय़न उवाच

तपोधर्मदमेज्याभिर्विप्रा यान्ति यथा दिवम् |  ५१   क
दानातिथ्यक्रिय़ाधर्मैर्यान्ति वैश्याश्च सद्गतिम् ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति