उद्योग पर्व  अध्याय १४९

वैशम्पाय़न उवाच

क्षिप्रहस्तश्चित्रय़ोधी मतः सेनापतिर्मम |  २८   क
अभेद्यकवचः श्रीमान्मातङ्ग इव यूथपः ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति