द्रोण पर्व  अध्याय ९१

सञ्जय़ उवाच

स विद्धो वहुभिर्वाणैर्जलसन्धेन वीर्यवान् |  ३३   क
नाकम्पत महावाहुस्तदद्भुतमिवाभवत् ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति