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शान्ति पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
दूरादेव तमालोक्य कृष्णो राजा च धर्मराट् |  ८   क
चत्वारः पाण्डवाश्चैव ते च शारद्वतादय़ः ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति