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शान्ति पर्व
अध्याय ३०२
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याज्ञवल्क्य उवाच
केवलेनेह पुण्येन गतिमूर्ध्वामवाप्नुय़ात् |  ४   क
पुण्यपापेन मानुष्यमधर्मेणाप्यधोगतिम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति