वन पर्व  अध्याय ३९

वैशम्पाय़न उवाच

ते श्रुत्व शर्ववचनमृषय़ः सत्यवादिनः |  ३०   क
प्रहृष्टमनसो जग्मुर्यथास्वं पुनराश्रमान् ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति