शान्ति पर्व  अध्याय १५

वैशम्पाय़न उवाच

चातुर्वर्ण्याप्रमोहाय़ सुनीतनय़नाय़ च |  ३५   क
दण्डो विधात्रा विहितो धर्मार्थावभिरक्षितुम् ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति