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आदि पर्व
अध्याय ११४
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वैशम्पाय़न उवाच
भविता प्रथितो राजा त्रिषु लोकेषु विश्रुतः |  ७   क
यशसा तेजसा चैव वृत्तेन च समन्वितः ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति