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शान्ति पर्व
अध्याय १५
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वैशम्पाय़न उवाच
नात्यन्तगुणवान्कश्चिन्न चाप्यत्यन्तनिर्गुणः |  ५०   क
उभय़ं सर्वकार्येषु दृश्यते साध्वसाधु च ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति