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शान्ति पर्व
अध्याय ५३
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वैशम्पाय़न उवाच
गच्छ शैनेय़ जानीहि गत्वा राजनिवेशनम् |  १०   क
अपि सज्जो महातेजा भीष्मं द्रष्टुं युथिष्ठिरः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति