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स्त्री पर्व
अध्याय १४
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गान्धार्यु उवाच
शेषे ह्यवस्थिते तात पुत्राणामन्तके त्वय़ि |  २२   क
न मे दुःखं भवेदेतद्यदि त्वं धर्ममाचरः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति