अनुशासन पर्व  अध्याय १५

उपमन्युरु उवाच

एतान्सहस्रशश्चान्यान्समनुध्यातवान्हरः |  १   क
कस्मात्प्रसादं भगवान्न कुर्यात्तव माधव ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति