अनुशासन पर्व  अध्याय १७

उपमन्युरु उवाच

सर्वतूर्यनिनादी च सर्ववाद्यपरिग्रहः |  ५९   क
व्यालरूपो विलावासी हेममाली तरङ्गवित् ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति