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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १५
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वैशम्पाय़न उवाच
धर्मेण राज्ञा धर्मज्ञ प्राप्तं राज्यमकण्टकम् |  १४   क
धर्मेण निहतः सङ्ख्ये स च राजा सुय़ोधनः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति