menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १५
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
पित्रा स्वय़मनुज्ञातं कृष्णद्वैपाय़नेन वै |  ४   क
वनवासाय़ धर्मज्ञा धर्मज्ञेन नृपेण च ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति