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विराट पर्व
अध्याय ३३
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वैशम्पाय़न उवाच
स प्रविश्य पुरं राज्ञो नृपवेश्माभ्ययात्ततः |  ८   क
अवतीर्य रथात्तूर्णमाख्यातुं प्रविवेश ह ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति