वन पर्व  अध्याय १५

कृष्ण उवाच

एवमादि महाराज विलप्य दिवमास्थितः |  १५   क
कामगेन स सौभेन क्षिप्त्वा मां कुरुनन्दन ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति