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भीष्म पर्व
अध्याय १५
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धृतराष्ट्र उवाच
पाण्डवानां महत्सैन्यं यं दृष्ट्वोद्यन्तमाहवे |  १२   क
कालाग्निमिव दुर्धर्षं समवेष्टत नित्यशः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति