भीष्म पर्व  अध्याय १५

धृतराष्ट्र उवाच

परिकृष्य स सेनां मे दशरात्रमनीकहा |  १३   क
जगामास्तमिवादित्यः कृत्वा कर्म सुदुष्करम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति