भीष्म पर्व  अध्याय २६

श्रीभगवानु उवाच

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा |  १४   क
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स वध्यते ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति