आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ४७

नारद उवाच

एवं स्वेनाग्निना राजा समाय़ुक्तो महीपते |  ७   क
मा शोचिथास्त्वं नृपतिं गतः स परमां गतिम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति