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द्रोण पर्व
अध्याय १५
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सञ्जय़ उवाच
मसारगल्वर्कसुवर्णरूप्यै; र्वज्रप्रवालस्फटिकैश्च मुख्यैः |  ५२   क
चित्रे रथे पाण्डुसुतो वभासे; नक्षत्रचित्रे विय़तीव चन्द्रः ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति