वन पर्व  अध्याय ३३

द्रौपद्यु उवाच

व्राह्मणं मे पिता पूर्वं वासय़ामास पण्डितम् |  ५६   क
सोऽस्मा अर्थमिमं प्राह पित्रे मे भरतर्षभ ||  ५६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति